UP के शख्स ने अपने शौक को बना ली पहचान, तैयार किया देश का सबसे बड़ा ‘रेडियो म्यूजियम’

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UP के शख्स ने अपने शौक को बना ली पहचान, तैयार किया देश का सबसे बड़ा ‘रेडियो म्यूजियम’

UP के शख्स ने अपने शौक को बना ली पहचान, तैयार किया देश का सबसे बड़ा ‘रेडियो म्यूजियम’

दुनिया में हर किसी को किसी न किसी चीज का शौक होता है 


पब्लिक न्यूज़ डेस्क। दुनिया में हर किसी को किसी न किसी चीज का शौक होता है और इसी शौक के चलते इंसान लोगों की बीच अपनी अलग पहचान बना पाता है। ऐसा ही कुछ यूपी के एक शख्स ने कर के दिखाया, जिसने अपने रेडियो सुनने के शौक से ही प्रेरणा ली और फिर इतना बड़ा रेडिया संग्रहालय तैयार किया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। अब इस संग्रहालय को देखकर कहा जा रहा है कि भारत में ऐसा रेडियो का संग्रहालय दूसरा देखने को नहीं मिलेगा।

सरकारी नौकरी से रिटायर होकर रेडियो संग्रहालय का शौक किया पूरा

पूरा मामला यूपी के अमरोहा जिले के गजरौला का है, जहां हाईवे किनारे में मोहल्ला नाईपुरा के रहने वाले राम सिंह बौद्व ने 2016 में यूपी भंडारण निगम विभाग में सीनियर सुपरिटेंडेंट के पद से रिटायर हुए और फिर उसके बाद अगले पांच साल तक उपभोक्ता न्यायालय में सचिव के पद पर काम किया। राम सिंह बौद्ध बताते हैं कि नौकरी के साथ-साथ उन्हें रेडियो सुनने का बहुत ज्यादा शौक था। और इसी शौक ने उन्हें एक बड़ा संग्रहालय बनाने के लिए प्रेरित किया।

संग्रहालय में 1300 से अधिक रेडियो का किया संग्रह

राम सिंह बौद्व बताते हैं कि अपने शौक से प्रेरणा लेकर वे संग्रहालय के काम को अंजाम देने के लिए वे साल 2010 से ही जुट गए और दस साल में सैड़कों किलोमीटर का सफर तय करते हुए एक रेडियो संग्रहालय बनाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने बताया कि कड़ी मेहनत के बाद अब उनके रेडियो संग्रहालय में 1300 से अधिक रेडियो मौजूद हैं। उनका दावा है कि शायद ही देश में उनसे ज्यादा रेडियो अन्य किसी व्यक्ति के पास मौजूद होंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास सबसे पुराना रेडियो सन 1900 का है, जिसके चलते अब वे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने के प्रयास में जुटे हुए हैं। इसके लिए उनकी ओर से की गईं  तैयारियों के बाद उनसे इग्लैड से पत्र के जरिए संग्रहालय की वीडियो फोटो आदि जानकारियां मांगी गई हैं।

संग्रहालय बनाने में कबाड़ियों का मिला सहयोग

राम सिंह बौद्ध ने बताया कि उनके संग्रहालय के इस शौक को पूरा करने में यूपी के अलग अलग जिलों में मौजूद कबाड़ियों का सहयोग मिला। वे बताते हैं कि 2010 में संग्रहालय बनाने के बाद उन्होंने यूपी के आसपास के जनपदों के बड़े कबाड़ियों से संपर्क किया, जिसके चलते मुरादाबाद, मेरठ, कालपी, कानपुर आदि जिलों के कबाड़ियों के जरिए ये रेडियो जुटाए गए। अभी मौजूदा समय में उनके पास अलग अलग मॉडल के तकरीबन 1300 रेडियो मौजूद हैं, को शायद अब कहीं देखने को भी नहीं मिलते हैं। उन्होंने आगे की जानकारी देते हुए बताया कि इस वक्त उनके संग्रहालय में टेबले रेडियो के साथ साथ पॉकेट रेडियो और बॉल रेडियो आदि भी मौजूद हैं।