269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त और 804 अखबारों को डीएवीपी ने विज्ञापन सूची से बाहर निकाला

269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त  और 804 अखबारों को डीएवीपी ने विज्ञापन सूची से बाहर निकाला

मोदी सरकार ने पिछले एक साल की जांच के बाद ढाई लाख से अधिक अखबारों का टाईटल निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही सैंकड़ों अखबारों को डीएवीपी की सूची से बाहर कर दिया गया है। इस पूरे मामले की जाँच के निर्देश दिए हैं। इसमें अपात्र अखबारों और मैंगजीन को सरकारी विज्ञापन देने की शिकायतों की जांच भी शामिल है। इसमें गड़बड़ी पाए जाने पर रिकवरी और कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी हैं।इस आदेश के चलते मीडियाजगत में हड़कंप है।
देश के इतिहास में पहली बार हुआ है जब एक साथ लगभग 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए गए है और 804 अखबारों को डीएवीपी ने अपनी विज्ञापन सूची से बाहर निकाल दिया है। इस कदम से लघु और माध्यम समाचार पत्रों के संचालकों में हड़कम्प मच गया है। पिछले काफी समय से मोदी सरकार ने समाचार पत्रों की धांधलियों को रोकने के लिए सख्ती की है। इसी कड़ी में आरएनआई ने समाचार पत्रों के टाइटल की समीक्षा शुरू कर दिया। समीक्षा में समाचार पत्रों की विसंगतियां सामने आने पर प्रथम चरण में आरएनआई ने प्रिवेंशन ऑफ प्रापर यूज एक्ट 1950 के तहत देश के 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए। इसमें सबसे ज्यादा 59703 अखबार-मैग्जीन महाराष्ट्र के है और दूसरे नम्बर पर उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश के 36822 अखबार-मैग्जीन टाईटल निरस्त किये गये है। 

इनके अलावा बिहार 4796, उत्तराखंड 1860, गुजरात 11970, हरियाणा 5613, हिमाचल प्रदेश 1055, छत्तीसगढ़ 2249, झारखंड 478, कर्नाटक 23931, केरल 15754, गोआ 655, मध्य प्रदेश 21371, मणिपुर 790, मेघालय 173, मिजोरम 872, नागालैंड 49, उड़ीसा 7649, पंजाब 7457, चंडीगढ़ 1560, राजस्थान 12591, सिक्किम 108, तमिलनाडु 16001, त्रिपुरा 230, पश्चिम बंगाल 16579, अरुणाचल प्रदेश 52, असम 1854, लक्षद्वीप 6, दिल्ली 3170 और पुडुचेरी के 523 अख़बार के टाइटल निरस्त कर दिए गए है।

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