जनरल रावत के निधन से चीन के साथ भारत की आक्रमकता पर असर पड़ेगा!

जनरल रावत के निधन से चीन के साथ भारत की आक्रमकता पर असर पड़ेगा!

देवकी नन्दन मिश्र की रिपोर्ट 
भारतीय सेना के चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल विपिन रावत का बुधवार को हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे में निधन के बाद भारत की चीन को लेकर बरती जा रही आक्रामकता पर क्या कोई असर पड़ेगा? इस समय दिल्ली के गलियारे में इसकी चर्चा हो रही है। आपको बता दे कि हेलीकाप्टर हादसे में जनरल रावत की पत्नी समेत कुल 13 लोगों की मौत हुई हो गई थी। 
जनरल विपिन रावत की मौत भारतीय सेना के लिए एक बड़ा झटका है और जानकर मानते हैं कि इसकी भरपाई बहुत आसान नहीं होगी।  भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल रावत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पद के लिए चुना था।  मोदी सरकार ने ही उन्हें दो अधिकारियों पर तरजीह देकर 2016 में देश का सेना प्रमुख बनाया था। जनरल रावत ने चीन की आक्रामक नीति के ख़िलाफ़ भारत की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया और 2017 में डोकलाम में और 2020 में गलवान में चीनी आक्रामकता का मुक़ाबला किया। 
ट्विटर पर जनरल विपिन रावत की मौत पर ढेर सारे रक्षा विश्लेषको ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।   भारत के रक्षा विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने उनकी मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्विटर पर कहा, "भारत के चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल रावत की मौत ऐसे मुश्किल समय में हुई है जब सीमा पर बीस महीनों से चले आ रहे चीन के आक्रामक रवैये ने हिमालय के मोर्चे पर युद्ध जैसे हालात पैदा किए हैं।"
एक और ट्वीट में चेलानी ने कहा, "स्पष्टवादी और साफ़ नज़रिए वाले जनरल रावत चीन की आक्रामकता के ख़िलाफ़ भारत का चेहरा थे।  जहां राजनीतिक नेतृत्व की ज़बान से 'चीन' शब्द नहीं निकल रहा था, तब जनरल रावत साफ़-साफ़ नाम ले रहे थे।"
आपको बता दे कि जून 2017 में अरुणाचल प्रदेश के डोकलाम पठार पर भारत और चीन की सेना आमने-सामने आ गई थी।  वहीं जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच हुए सीधे संघर्ष में बीस भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी जबकि कई चीनी सैनिक भी मारे गए थे। 
इन घटनाओं के बाद से ही भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है।  बीते कई दशकों में चीन सैन्य रूप से शक्तिशाली हुआ है और चीन ने भारतीय सीमा के नज़दीक सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई है।  इसके जवाब में भारत ने भी हिमालय के ऊंचे इलाक़े में भारी तादाद में सैनिक तैनात किए हैं और चीन सीमा तक भी मौसम में चालू रहने वाली सड़कें बनाई हैं। जनरल बिपिन रावत चीन की आक्रामकता के जवाब में भारतीय सेना की प्रतिक्रिया और तैयारी का नेतृत्व कर रहे थे।  आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि उनकी मौत का चीन को लेकर भारत की रणनीति पर असर पड़ सकता है।


कई विश्लेषक ये मान रहे हैं कि जनरल रावत की मौत ऐसे समय हुई है जब भारत के सामने चीन का ख़तरा बढ़ रहा है।  पश्चिमी पड़ोसी पाकिस्तान सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ और अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के ताक़तवर होने ने क्षेत्र के सुरक्षा समीकरण प्रभावित किए हैं। 

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